Saturday, September 19, 2009
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तुम्हारा स्पर्श '' शून्य-नेत्रों से गिरी बूँद रश्मि-स्रोतों से प्रथम साक्षात्कार दीर्घ-साधना की अनन्य उपलब्धि तुम्हारा स्पर्श आत्म का स्फुरण विशुद्ध चेतना-कंठ में कम्पित प्रार्थना-स्वर अचेतस को तत्क्षण चेतस-बुद्धि। तुम्हारा स्पर्श पुष्प-कलि के विकसन का आमोद स्थैर्य को निरन्तरता का सूत्र आनन्द की विभोरता का लघु-प्रहसन तुम्हारा स्पर्श रूठेपन का मधु-स्मित-अनुरोध सहज भाव-नर्तन का चित्र-विचित्र 'मैं'-'तुम' विलयन का सहज संचरण।
"खामोशी" ko bahut achche shabdon mey dhala hey !
ReplyDeleteMubarakbaad ......