Saturday, September 19, 2009


प्रेम केवल खामोशी
प्रेमकेवल खामोशी की ही भाषा जानता हैउसकी सारी ध्वनियाँ,सारे शब्द,सारे वाक्य चुप्पी से शुरू होते हैं और चुप्पी पर जाकर समाप्त हो जाते हैं।जैसे-जैसे कोईप्रेम के रंग में रंगता जाता है,शांत होता जाता है।इसलिएजब भी आपको कोई मिल जाएखामोश अथवा शांततो उसे बिना किसी संशय के प्रेमी जान लें।

No comments:

Post a Comment